दिल्लीपति सम्राट अनंगपाल तोमर का इतिहास | 10 Amazing Facts about Samrat Anangpal Tomar History in Hindi

By Vijay Singh Chawandia

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सम्राट अनंगपाल तोमर । भारत के प्राचीन इतिहास को अगर हम गौर से पढ़ते है, तो हमें ज्ञात होता है की वर्तमान दिल्ली जहां बसी हुई है । वह महाभारत काल से ही अस्तित्व में है। ( Samrat Anangpal Tomar History in Hindi ) . प्रोराणिक गाथाओं में इसे इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था । वर्तमान दिल्ली को मूल स्वरूप तोमर क्षत्रिय वश के सम्राट अनंगपाल तोमर ने दिया था ।

Samrat Anangpal Tomar दिल्ली के वास्तविक निर्माता के रूप में जाने जाते हे। उनके शासन में भारत की कीर्ति और यश पूरे विश्व में प्रकाशित था । अभी भी जहां कुतुबमीनार बनी हे उसके आस-पास के क्षेत्र में अनंगपाल तोमर द्वारा बनवाए गए सुंदर निर्माण की झलक देखने को मिल जाती हे। लालकिले के वास्तविक निर्माता भी अनंगपाल सिंह तोमर को ही माना जाता है। आज हम इस लेख में उनके इतिहास और जीवन से परिचय होते है ।

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सम्राट अनंगपाल तोमर का इतिहास और जीवन परिचय | History of Anangpal Tomar in Hindi

वर्तमान दिल्ली पर क्षत्रिय तोमर वंश का शासन 7वी. शताब्दी से शुरू होता है और 11वी. शताब्दी के अंत तक आते-आते समाप्त हो जाता है। दिल्ली के विषय में कहां जाता है की वह सात बार उजड़ी और आठ बार बस गई । अभी जिस जगह दिल्ली बसी हुई हे उसका श्रेय सम्राट अनंगपाल तोमर को जाता है।

अनंगपाल तोमर परिचय
राजवंशतोमर क्षत्रिय वंश
शासनकाल 1051 ईस्वी से 1081 के मध्य
महत्वपूर्ण निर्माणढिल्लिका गाँव बसाया जहाँ वर्तमान दिल्ली है,
और लाल कोट ( लालकिला ) का निर्माण करवाया
धर्म क्षत्रिय
हिन्दी भाषा में योगदान इन्होने दो ग्रन्थ “श्री अंगपाल” जो शुद्ध संस्कृत
और “श्री अनंगपाल” जो हरयाणवी बोली में थे,
लिखे यह दोनों हिन्दी भाषा के उत्थान में महत्वपूर्ण माने जाते है।
अन्यतोमर वंश के 16 वे सम्राट थे,
इन्होंने ही दिल्ली को बसाया था।

तोमर वंश की शुरुआत अनंगपाल सिंह प्रथम ने 7वी. शताब्दी के मध्य की थी और उनके शासन में तोमरों ने मध्य भारत और पूर्वी एवम् पश्चिमी भारत के एक बड़े भू-भाग पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था उन्होंने अनंगपुर नमक शहर बसाया था, उनके पश्चात सम्राट अनंगपाल तोमर द्वितीय ने अपने शासनकाल 11वी शताब्दी में डिल्लीका नामक एक गांव बसाया जो आगे चलकर वर्तमान दिल्ली के नाम से प्रसिद्ध हुई ।

तोमरों का शासन और दिल्ली का साम्राज्य विस्तार

मध्यकालीन भारतीय इतिहास में क्षत्रिय तोमर वंश का उदय 736 ई. में हुआ था । उस समय जब अनंगपाल सिंह प्रथम का शासन था ठीक उसी समय एक और क्षत्रिय प्रतिहार वंश के साम्राज्य का भी उदय हुआ था, उसके महान शासक थे नागभट्ट प्रथम ।

अनंगपाल तोमर का इतिहास | Anangpal Tomar History in Hindi
सम्राट अनंगपाल तोमर द्वितीय

यह वह वक्त था जब भारत पर विदेशी आक्रमण बहुत तेज हो गए थे, विदेशी भारत आते और लूटमार करके वापस भाग जाते । इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राजपूताना के आबू पर्वत पर एक यज्ञ करवाया गया, जिसमें सभी बड़े और छोटे साम्राज्यों से समल्लित होकर राष्ट्र रक्षा हेतु शपत ली ।

तोमरों ने अपने पूर्वजों पांडवों द्वारा बसाई इंद्रप्रस्थ नगरी को दुबारा बसाने हेतु उसी क्षेत्र के पास अनंगपुर नगर बसाया और शासन स्थापित किया । इसी वंश में आगे चलकर 1051 ईस्वी और 1081 के मध्य में अनंगपाल तोमर द्वितीय हुवे जिन्होंने वही डिल्लीका नामक जगह बसाई और एक किले लालकोट (लालकिला) का निर्माण करवाया जो वर्तमान में दिल्ली के नाम से विख्यात है। अनंगपाल सिंह तोमर ने अपने साम्राज्य को दूर पूर्वी और दक्षिण तक फैला दिया था, उनका विशाल साम्राज्य दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ था ।

सम्राट अनंगपाल तोमर की उपलब्धियां और विरासत | Samrat Anangpal Singh Tomar IInd History

ज्ञात ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार उत्तरी और मध्य भारत के 150 से अधिक राज्यों ने एक विशाल संगठन बनाया था, जिसका सम्राट दिल्ली के तोमर शासक थे । यह सभी मिलकर भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा हेतु वचनबद्ध थे ।

उस वक्त अनंगपाल तोमर भारत के सर्व शक्तिशाली सम्राट थे । उसके विषय में प्राप्त एक शिलालेख में यह लिखा गया है की:-

असिवर तोडिय रिउ कवालु, रणानाहु सिद्धू अनंगवालु ||

वल्भ्राविउ णायरायु, मानियनियण मनजनीय ||

अर्थात : सम्राट अनंगपाल तोमर सर्वत्र प्रसिद्ध है और अपने शत्रुओं के मस्तक को तोड़ देता है । उन्होंने तो भगवान के शेषनाग को भी हिला दिया है ।

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इस शिलालेख से आप Samrat Anangpal Tomar की शक्ति का अनुमान लगा सकते है। उनके शासन में सभी साम्राज्यों ने संगठित होकर गौरी के खिलाफ तराइन के युद्धों में भाग लिया था ।

सम्राट अनंगपाल तोमर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य | Facts about Samrat Anangpal Tomar Hindi

  1. लाल कोट ( लालकिला ) का निर्माण सम्राट अनंगपाल सिंह तोमर द्वितीय के शासनकाल में हुआ था ।
  2. प्रसिद्ध असीगढ़ का निर्माण भी अनंगपाल तोमर ने अपने गुरु हंसकर के लिए करवाया था । इस किले में बहुत बड़ा तलवारों को बनाने का कारखाना था । यह किला 80 किलों के केंद्र में होने और सभी का नियंत्रण रखने के कारण असीगढ़ कहलाया ।
  3. मध्यकालीन हिंदी के वास्तविक जनक अनंगपाल तोमर द्वितीय को ही माना जाता है । इनके द्वारा रचित “श्री अनंगपाल” रचना बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हे हिंदी भाषा के उत्थान में ।
  4. सम्राट अनंगपाल तोमर की दो बेटियां थी । जिनका नाम सुंदरी और कमला था । राजकुमारी सुंदरी का विवाह कन्नौज के शासक और राजकुमारी कमला का विवाह अजमेर के शासक के साथ हुआ था ।
  5. दिल्ली का प्रसिद्ध “लोह स्तंभ” 1052ईस्वी में अनंगपाल तोमर द्वारा ही वर्तमान स्थिति में स्थापित किया गया था ।
  6. Anangpal Tomar ने ही ढिल्लीका नामक गांव बसाया था जो वर्तमान में दिल्ली के नाम से प्रसिद्ध हे।
  7. अनंगपाल सिंह तोमर ने करौली में तहनगढ़ किला, और तंवरवाटी में पाटन किले का निर्माण करवाया था ।
  8. हरियाणा में अनंगपाल तोमर ने बल्लभगढ़, बादलगढ़, सौंख और महेंद्रगढ़ किलों का निर्माण भी करवाया था ।
  9. सम्राट अनंगपाल तोमर ने अपनी कुलदेवी योगमाया के मंदिर का निर्माण भी करवाया था । इस मंदिर के पास ही उन्होंने एक बावड़ी ( पक्का सीढ़ीनुमा तालाब) बनवाई अनंगताल बावड़ी के नाम से जाना जाता हे ।
  10. अनंगपाल तोमर के कोई संतान ना होने के कारण उन्होंने अपने नाती अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान को गोद ले लिया था । अतः अजमेर और दिल्ली का विलय होने से दिल्ली पर चौहानों का राज स्थापित हो गया था ।

FAQ’s

Q1. सम्राट अनंगपाल सिंह तोमर कौन थे?

Ans. क्षत्रिय तोमर वंश में जन्मे अनंगपाल सिंह तोमर द्वितीय दिल्ली के शासक थे, इन्होंने ही लालकिले का निर्माण करवाया था, और वर्तमान दिल्ली को बसाया था ।

Q2. तोमर वंश की कुलदेवी कौनसी है?

Ans. तोमर वंश की कुलदेवी योगमाया ( वर्तमान में चिल्लाय माता ) को माना गया है। तोमर वश के पूर्वज पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण की बहन को अपनी कुलदेवी मानकर पूजा अर्चना शुरू की थी, और इंद्रप्रस्थ में योगमाया का मंदिर बनवाया था । जो बाद में अनंगपाल सिंह तोमर ने दुबारा निर्मित करवाया था ।

Q3. अनंगपाल तोमर का जन्म कब हुआ था?

Ans. अनंगपाल सिंह तोमर की जयंती प्रतिवर्ष 20 जुलाई को मनाई जाती हे । ज्ञात तथ्यों के हिसाब से उनका जन्म 1051ईस्वी और 1081ईस्वी के मध्य हुआ था ।

Q4. तोमर वंश की उत्पत्ति कब हुई थी?

Ans. वैसे तो तोमरों को महाभारत काल के पांडवों का वंशज माना जाता हे । किन्तु 736ईस्वी में अनंगपाल सिंह तोमर प्रथम ने अपने साम्राज्य की नीव रखी थी और तभी से तोमर वंश का उदय माना जाता है।

Q5. तोमर वंश के अंतिम राजा कौन थे?

Ans. तेजपाल सिंह तोमर द्वितीय (1192-1193 ई) तोमर वंश के अंतिम राजा थे ।

आज आपने क्या जाना – निष्कर्ष

आज के लेख में पाठकों हमने भारत के ए महान सम्राट अनंगपाल तोमर का इतिहास से आपको परिचय करवाया है। जिन्होंने वर्तमान दिल्ली को बसाया था । मुझे आशा हैं आज Samrat Anangpal Tomar History in Hindi लेख से आपको बहुत कुछ इतिहास की जानकारी हुई होगी ।

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Vijay Singh Chawandia

मैं Vijay Singh Chawandia, Karni Times Network का Founder हूँ। Education की बात करूँ तो मैंने MA तक की पढ़ाई की है । मुझे नयी नयी Technology से सम्बंधित चीज़ों को सीखना और दूसरों को सिखाने में बड़ा मज़ा आता है। 2015 से मैं ब्लॉगिंग कर रहा हूँ। खाली समय में मुझे किताबें पढना बहुत पसंद है।