संक्षेप में: श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर बीकानेर के देशनोक से जयपुर तक 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की। 3 अगस्त को जयपुर कलेक्ट्रेट मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और वाटर कैनन में डीडवाना-कुचामन निवासी कार्यकर्ता देवराज सिंह पलाड़ा की मौत हो गई। मृतक के परिवार को मुआवजे को लेकर बुधवार को भाजपा और करणी सेना के बीच बैठक हुई, जिसमें आर्थिक सहायता और सरकारी संविदा नौकरी पर सहमति बनी।
विषय सूची (Table of Contents)
- •800 किलोमीटर की पैदल यात्रा, यूजीसी रोलबैक बनी मुख्य मांग
- •3 अगस्त: कलेक्टर को ज्ञापन, फिर वाटर कैनन और लाठीचार्ज
- •देवराज सिंह की मौत, परिवार को न्याय की मांग
- •बैठक में मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति
- •महिपाल सिंह मकराना ने क्या कहा
- •आगे क्या: गांव-गांव तक पहुंचेगा आंदोलन
- •अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- ↳महिपाल सिंह मकराना कौन हैं?
- ↳जयपुर में यूजीसी विरोध प्रदर्शन के दौरान किसकी मौत हुई?
- ↳देवराज सिंह के परिवार को क्या मुआवजा तय हुआ है?
- ↳करणी सेना की यूजीसी रोलबैक की मांग क्या है?
800 किलोमीटर की पैदल यात्रा, यूजीसी रोलबैक बनी मुख्य मांग
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों के विरोध में 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' निकाली गई थी। बीकानेर जिले के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा करीब 24 दिनों में लगभग 800 किलोमीटर की दूरी तय कर जयपुर पहुंची। संगठन का कहना है कि यह पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के खिलाफ जनजागरण के उद्देश्य से निकाली गई थी।
3 अगस्त: कलेक्टर को ज्ञापन, फिर वाटर कैनन और लाठीचार्ज
यात्रा के जयपुर पहुंचने पर 3 अगस्त को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग की गई। महिपाल सिंह मकराना का आरोप है कि प्रशासन से बातचीत के बावजूद कालवाड़ पुलिया के पास बैरिकेड लगाकर यात्रा को रोक दिया गया, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में महिलाएं, युवा और बच्चे भी प्रभावित होने का दावा किया गया।
देवराज सिंह की मौत, परिवार को न्याय की मांग
प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए डीडवाना-कुचामन जिले के पलाड़ा गांव निवासी कार्यकर्ता देवराज सिंह की एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। करणी सेना ने पुलिस कार्रवाई को इसका जिम्मेदार बताते हुए परिजनों के लिए एक करोड़ रुपए मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी। संगठन के अनुसार देवराज सिंह ओबीसी समाज से थे, लेकिन वे सवर्ण समाज के आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।
वहीं जयपुर पुलिस ने करणी सेना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रैली को कलेक्ट्रेट तक जाने की अनुमति थी, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर सीमित बल प्रयोग किया गया। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में देवराज सिंह की मौत लाठीचार्ज या वाटर कैनन से नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से हुई। मामले की जांच जारी है।
बैठक में मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति
देवराज सिंह की मौत के बाद बढ़ते विवाद के बीच करणी सेना ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। मुख्यमंत्री की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भेजा गया, जिन्होंने भंवर सिंह पलाड़ा के साथ मिलकर करणी सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक में महिपाल सिंह मकराना भी शामिल हुए। बुधवार को हुई बातचीत में मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी संविदा नौकरी देने पर सहमति बनी, हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जांच के बाद किए जाने का आश्वासन दिया गया।
महिपाल सिंह मकराना ने क्या कहा
बैठक के बाद जारी संबोधन में महिपाल सिंह मकराना ने इसे "दो दिन में दो बड़ी जीत" बताते हुए कहा कि यह जीत उनकी नहीं बल्कि पूरे सवर्ण समाज की ताकत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का रुख भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के व्यक्तिगत विचारों से अलग है और समाज अपने राजनीतिक फैसले खुद तय करेगा। मकराना ने आगामी पंचायती राज और नगर निगम चुनावों तक यूजीसी रोलबैक की मांग पर अडिग रहने की बात दोहराई और कहा कि अब यह आंदोलन मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तक ले जाया जाएगा।
उन्होंने देवराज सिंह के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि संगठन हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा और शहादत को याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने संगठन को बदनाम करने की कोशिशों और अंदरूनी विरोधियों को लेकर भी समर्थकों को सतर्क रहने की अपील की।
आगे क्या: गांव-गांव तक पहुंचेगा आंदोलन
महिपाल सिंह मकराना के अनुसार अब संगठन की टीम राजस्थान के हर गांव-ढाणी तक पहुंचेगी और यूजीसी रोलबैक तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने आगामी पंचायती राज चुनाव और नगर निगम चुनाव को इस मुद्दे पर समाज के रुख के लिए अहम बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
महिपाल सिंह मकराना कौन हैं?
महिपाल सिंह मकराना श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिन्होंने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में देशनोक से जयपुर तक 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा का नेतृत्व किया।
जयपुर में यूजीसी विरोध प्रदर्शन के दौरान किसकी मौत हुई?
डीडवाना-कुचामन जिले के पलाड़ा गांव निवासी कार्यकर्ता देवराज सिंह की 3 अगस्त को हुए प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद एसएमएस अस्पताल में मौत हो गई।
देवराज सिंह के परिवार को क्या मुआवजा तय हुआ है?
बुधवार को हुई बैठक में करणी सेना और भाजपा के बीच परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी संविदा नौकरी देने पर सहमति बनी है। अधिकारियों पर कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद तय होगी।
करणी सेना की यूजीसी रोलबैक की मांग क्या है?
संगठन यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नए दिशा-निर्देशों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहा है, जिसे लेकर देशभर में विरोध आंदोलन तेज करने की बात कही गई है।
नोट: लेख में शामिल बयान महिपाल सिंह मकराना के सार्वजनिक संबोधन पर आधारित हैं। मृत्यु के कारणों को लेकर पुलिस और करणी सेना के बीच स्थिति अलग-अलग है और मामले की जांच जारी है।