अगस्त 2026 तक राजस्थान में कुल 41 जिले हैं, जो 7 संभागों (जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, कोटा और भरतपुर) में बंटे हुए हैं। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों में कई बार बदली है — 33 से बढ़कर 50 हुई और फिर घटकर 41 पर आ टिकी। अगर आप भी इंटरनेट पर 50 जिलों की पुरानी जानकारी पढ़कर कन्फ्यूज़ हैं, तो यह लेख आपके लिए सबसे सटीक और अपडेटेड जवाब लेकर आया है।
विषय सूची (Table of Contents)
- •राजस्थान में जिलों की संख्या का इतिहास: 26 से 41 तक का सफर
- •2023 में 17 नए जिलों का गठन क्यों हुआ?
- •दिसंबर 2024 में 9 जिले क्यों समाप्त किए गए?
- •वर्तमान में कौन से 8 नए जिले बरकरार हैं?
- •राजस्थान के 41 जिलों की संभागवार पूरी सूची (2026)
- •राजस्थान में जिलों को लेकर आम भ्रम क्यों बना रहता है?
- •निष्कर्ष: राजस्थान के जिलों की सूची
राजस्थान में जिलों की संख्या का इतिहास: 26 से 41 तक का सफर
1 नवंबर 1956 को राजस्थान के एकीकरण के समय राज्य में कुल 26 जिले थे। समय के साथ प्रशासनिक ज़रूरतों के अनुसार नए जिले बनते रहे और यह संख्या धीरे-धीरे बढ़कर 33 हो गई। दशकों तक राजस्थान में यही 33 जिले प्रचलन में रहे, जब तक 2023 में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव नहीं हुआ।
2023 में 17 नए जिलों का गठन क्यों हुआ?
21 मार्च 2022 को तत्कालीन राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी, जिसका काम नए जिलों की आवश्यकता का आकलन करना था। इसी समिति की सिफारिशों के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने 5 अगस्त 2023 को एक अधिसूचना जारी कर 17 नए जिले और 3 नए संभाग (पाली, सीकर और बांसवाड़ा) बनाने की घोषणा की। इसके साथ ही जयपुर और जोधपुर जिलों को शहरी और ग्रामीण हिस्सों में भी बांटा गया। इस फैसले के बाद राजस्थान में जिलों की कुल संख्या बढ़कर 50 और संभागों की संख्या 10 हो गई थी।
दिसंबर 2024 में 9 जिले क्यों समाप्त किए गए?
सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने इन नए जिलों की व्यवहारिकता, राजस्व क्षमता और प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा के लिए एक कैबिनेट उप-समिति बनाई। इस समिति की सिफारिश पर 28 दिसंबर 2024 को कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि 17 में से 9 नए जिलों और तीनों नए संभागों (पाली, सीकर, बांसवाड़ा) को समाप्त कर उन्हें वापस उनके मूल जिलों में मिला दिया जाए। सरकार ने इसे प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से अव्यवहारिक बताते हुए यह कदम उठाया, हालांकि कुछ राजनीतिक दलों और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने इस पर असहमति भी जताई।
जिन 9 जिलों को समाप्त किया गया, वे हैं:
अनूपगढ़, दूदू, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीमकाथाना, सांचौर और शाहपुरा।
वर्तमान में कौन से 8 नए जिले बरकरार हैं?
2023 में बने 17 नए जिलों में से 8 जिले आज भी पूरी तरह कार्यरत हैं और इनमें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) व अन्य प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। ये जिले हैं — बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, फलौदी और सलूंबर। इन्हीं 8 जिलों के जुड़ने से राजस्थान के मूल 33 जिलों की संख्या बढ़कर वर्तमान 41 हो गई है।
राजस्थान के 41 जिलों की संभागवार पूरी सूची (2026)
जयपुर संभाग (7 जिले): जयपुर, अलवर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा।
जोधपुर संभाग (8 जिले): जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, पाली, सिरोही, बालोतरा, फलौदी।
उदयपुर संभाग (7 जिले): उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सलूंबर।
अजमेर संभाग (6 जिले): अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन।
बीकानेर संभाग (4 जिले): बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़।
कोटा संभाग (4 जिले): कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़।
भरतपुर संभाग (5 जिले): भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, डीग।
राजस्थान में जिलों को लेकर आम भ्रम क्यों बना रहता है?
चूंकि 2023 से 2024 के बीच बहुत कम समय में राजस्थान में जिलों की संख्या दो बार बदली — पहले 33 से 50 और फिर 50 से 41 — इसलिए इंटरनेट पर आज भी कई पुराने लेख और वीडियो 50 जिलों की जानकारी दिखाते हैं, जो अब सही नहीं है। सरकारी परीक्षाओं (RAS, RPSC, SSC, पटवारी आदि) की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को हमेशा नवीनतम और आधिकारिक स्रोत से ही जिलों की संख्या और सूची की पुष्टि करनी चाहिए।
निष्कर्ष: राजस्थान के जिलों की सूची
संक्षेप में कहें तो, अगस्त 2026 तक राजस्थान में आधिकारिक रूप से 41 जिले और 7 संभाग हैं — न 33, न 50। यह संख्या 2023 में बने 17 नए जिलों में से 9 के दिसंबर 2024 में समाप्त होने के बाद स्थिर हुई है। यह विषय प्रशासनिक रूप से संवेदनशील है और भविष्य में सरकार की नीतियों के अनुसार दोबारा बदलाव संभव है, इसलिए ताज़ा जानकारी के लिए राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नज़र रखना उचित रहेगा।